कभी कहा ना किसी से तेरे फ़साने को
न जाने कैसे ख़बर हो गयी ज़माने को
सुना है गैर की महफिल में तुम न जाओगे
कहो तो आज सजा लूँ ग़रीब खाने को
दुआ बहार की मांगी तो इतने फूल खिले
कही जगह न मिली मेरे आशियाने को
चमन में जाना तो सय्याद देख कर जाना
अकेले छोड़ कर आया हूँ आशियाने को
मेरी लहद पे पतंगो का खून होता है
हुजुर शमा ना लाया करे जलाने को
दबा के कब्र में सब चल दिए दुआ न सलाम
ज़रा सी देर में क्या हो गया ज़माने को
अब आगे इस में तुम्हारे भी नाम आएगा
जो हुकुम हो तो यहीं छोड़ दूँ फ़साने को
Qamar ज़रा भी नही तुमको खौफ-ऐ-रुसवाई
के चाँदनी पे चले हो उन्हें मनाने को

2 Comments:
http://urdushayari8.blogspot.com/2020/02/attitude-status-for-whatsapp-in-english.html
best poetry
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